बच्चों के बिगड़ने का कारन और बिगड़े बच्चों को कैसे सुधारे

नमस्कार दोस्तों, आज के Post से हम जानेंगे बच्चों के बिगड़ने का कारन” कैसे हमारे बच्चे बिगड़ते है और उनको कैसे सही समय पे सुधार जाये. अगर आप हमारे Post पहली बार पढ़ रहे है तो आपको बताना चाहूंगा हमारे website में बच्चों की सही परवरिश कैसे करे इसके बारे में हर एक चीजे बताया गया है आपको एकबार उन सब post को जरूर पढ़ना चाहिए।

दोस्तों आप हमारे website को अपने bookmark में save जरूर कर ले और रोजाना visit करते रहे। आपको यहाँ से complete बच्चों की परवरिश कैसे करे उसकी जानकारी दी जायेगी, इसके अलावा और भी बहुत से चीजों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते है वो भी 100% free. तो चलिए आज के पोस्ट की और चलते है. कैसे हमारे बच्चे बिगड़ते है और उनको कैसे सही समय पे सुधार जाय।

baccho ke bigadne ka karan

इस दुनिया में कोई भी चीज बिना कारन नहीं होती, हर एक चीज के पीछे कोई ना कोई कारन जरूर छिपा होता है। इसलिए दोस्तों अगर हमे किसी भी समस्या का कारन पता चल जाये तो हम तुरंत उस समस्या का समाधान निकाल सकते है।

बच्चे बिगड़ने के पीछे सबसे बड़ा हात उनके माँ बाप का होता है क्योंकि एक बच्चा जब जन्म लेता है तब उसके माँ बाप उसके हर चीजों का ख्याल रखते है जैसे की कब बच्चे को खिलाना, कब बच्चे को सुलाना है और भी बहुत कुछ। मगर जैसे जैसे बच्चे बड़े होते जाते है उन पे ध्यान देना छोड़ देते है उनको यह लगने लगता है बच्चा बड़ा हो चूका है उसको अपने हिसाब से चलने दो और इसी से एक बच्चा बिगड़ने के रह पर चल देता है। तो चलिए जानते है कुछ मुख्या कारन बच्चे बिगड़ने का। – बच्चों को कैसे सुधारे

बच्चों के बिगड़ने का कारन – और बिगड़े बच्चों को कैसे सुधारे

सख्ती से पेश आना –
बच्चों के बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण उनके साथ सख्ती से पेश आना होता है, वो कैसे आपको बताते है। जब एक छोटा बच्चा बड़ा होने लगता है तब धीरे धीरे माँ-बाप का प्यार भी कम होने लगता है, क्योंकि उन्हें यह लगता है अब ज्यादा प्यार करने से बच्चा सिर पर चढ़ जायेगा और बिगड़ जायेगा. इसलिए माँ-बाप अपने बच्चों से सख्ती से पेश आते है और यह सोचते है इससे बच्चों का ही भला होगा और बच्चे strong होंगे।

मगर दोस्तों इससे बच्चे सुधरने की जगह और बिगड़ जाते है और कमजोर हो जाता है. क्योंकि जब तक हम बच्चों से दूरी बनाए रखेंगे, उनके साथ सख्ती से पेश आएंगे, उनके बाते नहीं सुनेंगे, उनके साथ समय नहीं बिताएंगे तबतक हम उनको समझ नहीं पाएंगे और जबतक समझ नहीं पाएंगे तबतक हम बच्चे को सुधार नहीं सकते।

बच्चों के साथ सख्ती से पेश आने से उनके मन में डर बैठ जाता है उनको यह लगता है अगर वो कुछ गलत करे तो उनको अपने घरवालों से बहुत डाट पड़ेगी, और इसी डर के बजह से बच्चे अकेले रहते है अपनी दिल की बाते घरवालों से share नहीं करते है और कोई गलती करने पढ़ घर में झूठ भी बोलते है क्योंकि उन्हें अपने घरवालों का डर रहता है। इसलिए अपने बच्चों के साथ सख्ती से पेश ना आये उनको अपना दोस्त बनाकर रखे।

बच्चों को तानें मारने से बचे –
पहली बात तो यह है हमे कभी भी अपने बच्चे और किसी और के बच्चे को कभी ताने नहीं मारना चाहिए क्योंकि इससे बच्चे ढीट हो जाते है और हमारे बातों का उनपर कोई असर नहीं होता है।

किसी भी बात को Negetive तरीके से कहने को तानें मारना कहते है। लोग समझते है कि तानें मारने से बच्चों की आदतों में सुधार होता है। पर ऐसा नहीं है, तानों से उल्टा बच्चों के मन को चोट पहुँचती है और वे ढीट हो जाते है, क्योंकि उन्हें यह लगता है आप हमेशा तानें ही मारते रहते है।

इसलिए बच्चों को कभी भी तानें ना मारे बलकि उनको हर बात अच्छे से समझाए, क्योंकि बच्चे प्यार की भाषा समझते है। आप हर Negetive बातो को Positive तरीके से अपने बच्चों से कहे इससे आपके बच्चे ढीट भी नहीं होंगे और आपके हर बातों को अच्छे से सुनेंगे आप नीचे दिए गए कुछ उदहारण से समझ सकते है कैसे नेगेटिव बातों को पॉजिटिव तरीके से पेश करना चाहिए बच्चों में सामने।
1.
* Negetive शब्द – तुम कभी नहीं सुधरोगे
* Positive शब्द – तुम तो अब काफी अच्छा काम कर लेते हो।

2.
* Negetive शब्द – एक नंबर का बेवकूफ कुछ नहीं आता
* Positive शब्द – बेटा तुम तो बहुत समझदार बच्चे हो, फिर तुमसे गलती कैसे हो गई चलो कोई बात नहीं हम दुबारा कोशिस करते है और इसबार अच्छे से मन लगाकर करना।

आशा करता हु दोस्तों उप्पर दिए गए उदहारण से आप समझ गए होंगे बच्चों से कैसे बात करनी चाहिए और बच्चों को कैसे समझाए

बच्चों की तुलना ना करे –
इस दुनिया में हर एक बच्चे में अलग talent होता है कोई बच्चा पढ़ाई में अच्छा होता है तो कोई खेलकूद में इसलिए हमें अपने बच्चों को समझाते वक़्त किसी दूसरे बच्चों से तुलना नहीं करना चाहिए, आप सिर्फ अपने बच्चे को उदहारण दे सकते है एक अच्छे बच्चे का मगर तुलना कभी नहीं करे इससे उनके मन को दुःख पहुचते है, और वे सोचते है की वे अच्छे बच्चे नहीं है और Negetive हो जाते है।

और एक बच्चा अच्छा तभी बन पाता है जब उसके माँ-बाप उसके पीछे करि मेहनत करे और बच्चे को हमेशा हौसला देते रहे, हर कदम में बच्चे के साथ रहे उनको हर वक़्त यह महशुस कराये जो वो सबसे अच्छा बच्चा है। यह नहीं होना चाहिए हमेशा अपने बच्चे को दूसरे बच्चों से तुलना करते रहे और उनके उप्पर बोझ डालते रहे, और उनको तानें मारते रहे।

गलत संगती से बचायें –
माता-पिता का यह कर्तव्य है कि वे बच्चों से बात करते रहे और उनके दोस्तों और उनके आदतों के बारे में जरूर पूछते रहे, बच्चे के बात चित में अगर कोई बदलाव आए तो उसको नज़र अंदाज़ बिलकुल भी ना करे उसके गहराई तक जाए और देखे कही आपका बच्चा किसी गलत संगती में तो नहीं है।

गलत सांगत के कारण बच्चे वो चीजें कर जाते है जिसको हम सपनें में भी कल्पना नहीं कर सकते है जैसे की ड्र्ग्स लेना, पैसे चोरी करना, जुआ खेलने, नशा करना, सिगरेट पीना, स्कूल से भागकर कही घूमने जाना व movie देखने जाना, आवारा गर्दी करना।

ढील देना –
बच्चों के बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण यही होता है जो हम बच्चों को एकदम ढीला छोड़ देते है और वो जो करते है उसी को हम ठीक समझते है चाहे गलत काम करे या सही काम करे, इससे बच्चे के अंदर घमंड आ जाती है और वो यह सोचने लगता है में अपने मर्ज़ी का मालिक हु जब जो चाहे वाही करूँगा मेरे माँ-बाप भी कुछ नहीं कहेंगे।

अगर आप अपने बच्चे को ऐसे ही ढीला छोड़ कर रखते है तो आप खुद अपने बच्चे को बिगाड़ रहे है और उनके भविष्य अंधकार में डाल रहे है क्योंकि एक बच्चे को अगर ढीला छोड़ दिया जाये तो बो बच्चा बाद में अपने माँ-बाप की भी नहीं सुनता इसलिए उनपर अपना control बनाये रखे।

आशा करता हूँ आप सबको यह Article अच्छा लगा होगा आप हमारे दूसरे Articles को भी जरूर पढ़े।

Tag:- Bachho Ki Parvarish Kaise Kare, Bachho Ko Kaise Sudhare, Bachho Ko Kaise Samjhaye, Bachho Ke Bigadne Ka karan, Bigde Bachhe Ko kaise Sudhare.


(Visited 4,483 times, 24 visits today)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *